योगी सरकार यूपी के 1.78 लाख शिक्षामित्रों के भाग्य का फैसला करेगी

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के 1.78 लाख शिक्षामित्रों ने अब अपने भाग्य का फैसला योगी सरकार के पाले में डाल दिया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने तय किया है कि हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि वह नियम बनाकर शिक्षामित्रों को पूर्ण अध्यापक का दर्जा दिलाए. अपनी मांग को सरकार के सामने मजबूती से रखने के लिए समायोजित शिक्षामित्रों ने बुधवार से स्कूल नहीं जाने का फैसला लिया है. आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र शाही के हवाले से मीडिया में आई खबर के मुताबिक वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है.

जलीकट्टू को आधार बनाकर शिक्षामित्रों ने रखी मांग: शिक्षामित्रों का कहना है कि तमिलनाडु में जलीकट्टू के मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद वहां राज्य सरकार ने जनता की इच्छा का ख्याल रखते हुए बिल लाया गया था. ऐसे में योगी सरकार भी शिक्षामित्रों के समायोजन करने के लिए इसी तरह के कदम उठाए.

2019 का चुनाव देखते हुए शिक्षामित्र दबाव बना सकते हैं…

जानकारों का कहना है कि शिक्षामित्र अपने समायोजन के लिए यूपी की योगी सरकार पर दबाव बना सकती है. उनका कहना है कि 2019 में लोकसभा चुनाव है. यूपी की राजनीति में शिक्षक भर्ती बड़ा मुद्दा होता है, ऐसे में शिक्षामित्र अपनी बात योगी सरकार से मनवाने के लिए बड़ा कदम भी उठा सकते हैं. पिछली सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कई रैलियों में कहा था कि अगर केंद्र शिक्षक भर्ती के नियमों में थोड़ा बदलाव कर दे तो उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के शिक्षक बनने का रास्ता साफ हो सकता है. बलिया की चुनावी रैली में शिक्षामित्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें बताई थी, जिसपर उन्होंने इसे निपटाने का आश्वासन भी दिया था.

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