नई दिल्ली : भारत की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री पर फैसला आज आने की संभावना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट आरुषि मर्डर के 9 साल 4 महीने और 26 दिन के बाद अपना फैसला देगा। देश के सभी लोगों को सकते में डालने वाली मर्डर मिस्ट्री में आज हाईकोर्ट ये तय करेगा कि निचली अदालत का फैसला सही है या नहीं। आज ये भी तय हो जाएगा कि आरुषि के माता-पिता राजेश और नुपुर तलवार की सज़ा बरकरार रहेगी या फिर वो जेल से छूट जाएंगे। हाईकोर्ट के दो जजों की बैंच आज आरुषि के माता-पिता की अपील पर फैसला सुनानी वाली है। डासना जेल में उम्रकैद की सज़ा काट रहे राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ गुहार लगाई है। सीबीआई की अदालत राजेश और नुपुर तलवार को आरूषि-हेमराज मर्डर केस में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुना चुकी है।
AARUSHI TALWAR MURDER | Snapshot of Aarushi Talwar in her younger and happier days.
राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने हाईकोर्ट से कहा है कि वो निर्दोष हैं, उन्होंने न तो अपनी बेटी का मर्डर किया और न ही नौकर हेमराज का। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरुषि के माता पिता को 2013 में सज़ा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ तलवार दंपत्ति ने हाईकोर्ट में अर्जी दी है।
हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले की हर बारिकी को देख चुका है। हाईकोर्ट के दो जजों की बैंच उन सारे पहलुओं पर गौर कर चुकी है जिनके आधार पर निचली अदालत ने फैसला दिया। हाईकोर्ट ये भी देखेगा कि जिन्हें मर्डर का दोषी माना गया है उनकी दलीलों में कितना दम है।
आइये नजर डालते हैं आरुषि केस में कब क्या हुआ …
16 मई 2008 – नोएडा के जलवायु विहार के फ्लैट नंबर L-32 में आरूषि मृत पाई गई
17 मई 2008 – शुरूआती शक नौकर हेमराज पर, हेमराज का शव भी फ्लैट की छत पर मिला
23 मई 2008 – आरूषि के पिता डॉ.राजेश तलवार डबल मर्डर के आरोप में गिरफ्तार
31 मई 2008 – तत्कालीन मायावती सरकार ने केस सीबीआई को ट्रांसफर किया
12 जुलाई 2008 – सबूत के अभाव में डॉ. राजेश तलवार को जमानत दी गई
29 दिसंबर 2010 – सबूत के अभाव में सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की
9 फरवरी 2011 – क्लोजर रिपोर्ट खारिज, कोर्ट ने तलवार दंपत्ति पर केस चलाने को कहा
14 मार्च 2012 – सीबीआई ने राजेश तलवार की जमानत खारिज करने की अपील की
30 अप्रैल 2012 – सीबीआई ने आरूषि की मां डॉ. नूपुर तलवार को गिरफ्तार किया
3 मई 2012 – सेशन कोर्ट से डॉ. नूपुर तलवार की जमानत याचिका खारिज
25 सितंबर 2012 – नूपुर तलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत दी गई
18 अक्टूबर 2013 – कोर्ट में सीबीआई ने कहा कि तलवार दंपत्ति ने जांच को गुमराह किया
25 नवंबर 2013 – कोर्ट ने राजेश और नूपुर तलवार को डबल मर्डर का दोषी करार दिया
26 नवंबर 2013 – राजेश और नूपुर तलवार को उम्रकैद की सज़ा, दोनों डासना जेल में बंद
इस केस के दांव पेंचों ने पहले पुलिस को छकाया फिर सीबीआई को इतना मजबूर कर दिया कि वो बिना किसी ठोस नतीजे के अदालत के सामने पहुंच गई। अदालती कार्यवाही के दौरान जो कुछ हुआ वो इस देश में केवल कुछ ही केसों में हुआ है। ये अनूठा केस बन गया था। पता ही नहीं चल रहा था कि आरुषी और हेमराज का मर्डर किसने किया और उससे भी बड़ा सवाल की मर्डर क्यों हुआ।
क्यों हैं तलवार दंपति दोषी?…
-आरूषि का बेडरूम और उसके पैरेंट्स का कमरा बिल्कुल सटा था
-हेमराज का शव छत पर मिला, छत का दरवाजा अंदर से बंद था
-घटना की रात फ्लैट में 4 लोग, तलवार दंपति, आरूषि, हेमराज
-आरूषि-हेमराज की हत्या..बाहरी व्यक्ति के आने की गुंजाइश नहीं
-हत्या की पूरी रात इंटरनेट चालू, एक आरोपी पूरी रात जगा था
-इंटरनेट चालू होने की वजह से रात में बिजली गुल की बात गलत
-किसी बाहरी व्यक्ति के घर में घुसने का भी कोई सबूत नहीं मिला
-फ्लैट में चोरी या सामान के गायब होने का सबूत नहीं था
-तलवार दंपति के कपड़ों पर खून नहीं मिलना एक सबूत माना गया
-डाइनिंग टेबल पर स्कॉच की बोतल पर खून के निशान
-बाहरी व्यक्ति का हेमराज को मारकर शव छत पर ले जाना संभव नहीं
-मर्डर से पहले कभी भी छत के दरवाजे पर ताला नहीं लगाया गया
-सीढ़ियों पर गिरे खून को साफ करने की कोशिश की गई थी
-गायब गोल्फ स्टिक कुछ दिन बाद तलवार के घर से ही मिली थी
-आरूषि-हेमराज के सिर-गर्दन पर गोल्फ स्टिक के चोट के जख्म थे
आरुषि की मर्डर मिस्ट्री इतनी उलझी हुई थी कि उसे कोई एजेंसी सुलझा नहीं पाई। कई सवाल तो अब भी जवाब तलाश रहे हैं। साढ़े पांच साल के लंबे इंतजार के बाद आरुषि के मां-बाप को सजा तो हो गई थी, लेकिन देश को उन सारे अनसुलझे सवालों का जवाब नहीं मिल पाया जिसका जवाब खोजने में यूपी पुलिस और सीबीआई की टीम पूरी तरह से फेल हो गई थी।
कोर्ट फैसला सुना चुका था लेकिन अनुमान और आकलन के आधार पर सुनाए गए इस फैसले में ऐसे कई अनसुलझे सवाल थे जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता था लेकिन जवाब ना पुलिस दे पा रही थी, ना सीबीआई। देखते ही देखते ये घटना सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बन गई। अब तक इस मामले में पता ही नहीं चल पाया है कि
-हत्या के लिए इस्तेमाल हथियार कहां है?
-दीवार पर खूनी पंजे के निशान किसके थे?
-स्कॉच की बोतल पर किसके हाथ के निशान थे?
-सीढ़ियों पर खून के धब्बे किसके थे?
-आरुषि के खून से सने कपड़े कहां हैं?
-फिंगर प्रिंट के साथ छेड़छाड़ किसने की?
-हत्या की रात क्या बाहर से कोई आया था?
-हेमराज की लाश घर की छत पर कौन ले गया?
-और सबसे बड़ा सवाल कि आरुषि-हेमराज के कत्ल का मकसद क्या था?
आरुषि और हेमराज का बिलकुल सीधा-सा दिखने वाला दोहरा हत्याकांड सबसे रहस्यमय मामला क्यों बन गया। कहा जाता है कि पुलिस की लापरवाही, उसकी भूल और उसकी गलतियों की वजह से हत्या की ये कहानी सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बन गई।