देश में तेजी से बदलाव लाने के लिए नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की तीसरी बैठक रविवार को हुई। राष्ट्रपति भवन में हुई इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। सूत्रों के मुताबिक, नीति (नैशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) आयोग की बैठक में भारत में बदलाव लाने का अगले 15 साल का रोडमैप पेश हुआ। इसमें 7 साल का रणनीतिक दस्तावेज तथा तीन साल का ऐक्शन प्लान शामिल है। बता दें कि इस बैठक में कैबिनेट मंत्री, राज्यों के सीएम, अधिकारी, नीति आयोग के सदस्य और खास तौर पर बुलाए गए मेहमान शामिल हुए। हालांकि, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस बैठक में नहीं गए। केजरीवाल की जगह डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे।
मांगा मुख्यमंत्रियों का सहयोग
बैठक में मोदी ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि ‘न्यू इंडिया’ का विजन तभी साकार हो सकता है, जब राज्य और उसके मुख्यमंत्री मिलकर प्रयास करें। राज्य भी अब नीति निर्धारण की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। मुख्यमंत्रियों की अहमियत पर बोलते हुए पीएम ने कहा कि नीति के जरिए अहम मुद्दों मसलन-केंद्रीय योजनाओं, स्वच्छ भारत, स्किल डिवेलपमेंट और डिजिटल पेमेंट आदि पर मुख्यमंत्रियों की राय ली जाएगी।
पीएम के मुताबिक, देश में बदलाव लाने के लिए नीती आयोग नए जोश के साथ कदम उठा रहा है। पीएम ने यह भी माना कि नीति आयोग सरकारी इनपुट्स पर आधारित नहीं है। बदलाव को साकार करने के लिए युवा विशेषज्ञों और एक्सपर्ट को जोड़ा गया है।
विपक्षी पार्टियों से कौन आया
विपक्ष शासित राज्यों में से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनिसामी बैठक में शामिल हुए। बैठक में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी पहुंचे। इनके अलावा मीटिंग में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों में नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, सुरेश प्रभु, प्रकाश जावड़ेकर, राव इंद्रजीत सिंह और स्मृति इरानी आदि प्रमुख रहे।