मोदी सरकार रेंट टू ओन पॉलिसी लेके आ रही है जिससे किराए पर घर लेकर रहने वाले लोगो को किराया देने के झंझट से मुक्ति मिल सके. आवास मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट मंजूरी के लिए भेज दिया है. उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में इसे हरी झंडी मिल जाएगी. ‘रेंट टू ओन’ के तहत शहरों में सरकारी संस्थाएं 8-10 साल के लिए घर को लीज पर देगी. किराया घर की कीमत के मुताबिक तय किया जाएगा.
लीज की समय सीमा पूरी होने के बाद अगर आप घर खरीदना चाहें तो आपको ईएमआई चुकानी होगी. ईएमआई का एक हिस्सा किराए के रूप में जमा होगा जबकि बाकी सरकार के पास अलग खाते में जमा होगा. जब जमा की गई कुल राशि घर की कीमत का 10 फीसदी हो जाएगी तो घर की रजिस्ट्री किराएदार के नाम कर दी जाएगी.
अगर किसी वजह से आप रकम जमा नहीं कर पाते हैं तो सरकार इस मकान को दोबारा बेच देगी और किराए के अलावा अलग खाते में जमा की गई राशि किराएदार को वापस लौटा दी जाएगी. लेकिन उसपर कोई ब्याज नहीं मिलेगा. एक अनुमान के मुताबिक देश भर में 27 फीसदी लोग किराए पर रहते हैं जबकि 1 करोड़ से ज्यादा घर खाली हैं. केंद्र सरकार के मुताबिक इस स्कीम का बड़ा फायदा अलग अलग शहरों में नौकरी पेशा लोगों को होगा.