PM मोदी से मिलीं जम्मू कश्मीर की CM महबूबा

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जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीर में बिगड़े हालातों के बीच सोमवार को नई दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से चर्चा की. महबूबा ने इस बातचीत के बाद कहा कि पत्थरबाजी और गोलीबारी के बीच बातचीत संभव नहीं है.उन्होंने कहा कि कश्मीर का हल वाजपेयी की नीति से निकाला जाए. उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि केंद्र को राज्य के कल्याण के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए.

अलगाववादियों से बातचीत संभव
CM महबूबा के मुताबिक़ उनकी सरकार घाटी में 2-3 महीने में स्थिति को नियंत्रित कर लेगी. उन्होंने कहा कि हम चीजें बदल लेंगे. महबूबा ने ये बयान पीएम मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद दिया. उन्होंने कहा कि 2-3 महीने के समय में अलगाववादी के साथ बातचीत संभव है. उन्होंने यह भी कहा कि बंदूकें और पत्थरों की छाया में कोई बातचीत नहीं हो सकती है, लेकिन घाटी की स्थिति में सुधार होने पर अलगाववादियों के साथ बातचीत हो सकती है.

जम्मू कश्मीर के cm ने घाटी में जारी पत्थरबाजी की घटनाओं पर कहा कि ऐसा करने वाले कुछ नौजवान हैं जो गुस्से में हैं. उन्होंने आगे कहा कि ये नौजबान अपने मन मर्जी से इस काम को अंजाम नहीं दे रहे बल्कि इन नौजवानों को उकसाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस बैठक में कश्मीर के हालत और कानून-व्यवस्था पर भी चर्चा की गई. इसके अलावा गठबंधन पर भी चर्चा हुई.

जम्मू – कश्मीर के मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बातचीत में सिंधु जल संधि और उपचुनावों के दौरान हुई कम वोटिंग पर भी चर्चा की गई है. महबूबा ने बताया कि उन्होंने पीएम पर दबाव डाला कि पानी कि समस्या पर ध्यान दें. उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों से हमें नुकसान हो रहा है. एक तरफ से पत्थर चलते हैं दूसरे तरफ से गोलियां इससे नौजवान निराश हैं.

नीति आयोग की बैठक में हुई थी चर्चा
इससे पहले रविवार को नीति आयोग की बैठक के दौरान भी महबूबा ने सभी राज्यों के सीएम से उनके यहां पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी. इसके बाद मोदी ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए बैठक में ही सभी राज्य सरकारों से अपील की थी कि सभी सीएम अपने-अपने राज्यों में मौजूद जम्मू कश्मीर के छात्रों से संपर्क करें.

क्या था मामला
आपको बता दें कि राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय में कश्मीर के छह छात्रों की कुछ स्थानीय लोगों ने पिटाई कर दी थी. मेरठ में भी एक होर्डिंग लगाकर कश्मीरी छात्रों से उत्तरप्रदेश छोड़ने के लिए कहा गया था.

कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा सस्पेंड होने के बाद से पूर्वनियोजित पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी देखेने को मिल रही है. बता दें कि घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए करीब 300 वॉट्सऐप ग्रुप चलाए जा रहे थे. इन्हीं ग्रुप्स के जरिए ये संदेश दिया जाता था कि पत्थरबाजी की घटना को कहां अंजाम दिया जाना है.

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