प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के द हेग में वहां रह रहे भारतीय समुदाय को संबोधित किया. पीएम के मंच पर आते ही सभागार में ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगने शुरू हो गए. पीएम ने अपने भाषण की शुरूआत भोजपुरी में की, उन्होंने पूछा- ‘का हाल बा’. पीएम ने कहा कि दुनिया के हर कोने में रहने वाला हर भारतीय एक राष्ट्रदूत है, उनकी यह बात सुनते ही सभागार में ‘भारतमाता की जय’ के नारे गूंजने लगे.
पीएम ने कहा कि सरकार की तरफ से एम्बैसी होती है, एम्बैसडर होते हैं लेकिन उन्हें राजदूत कहते हैं. लेकिन दुनिया के अलग-अलग कोने में रहने वाले हिंदुस्तानी भारत के राष्ट्रदूत हैं.
जनता चलाती है देश
– उन्होंने कहा, “जब मैं दुनिया के नेताओं से मिलता हूं तो वे मुझे देखते रहते हैं. उनको लगता है कि छोटे से देश को चलाने में हमें दिक्कत होती है, तो इतने बड़े देश को कैसे चलाते हो. मैं कहता हूं कि यहां देश आप चलाते हैं मेरे यहां सवा सौ करोड़ देशवासी चलाते हैं. मैंने सबसे बड़ा प्रयास किया है कि जनभागीदारी को देश के हर काम में प्राथमिकता देना. सारी समस्याओं का हल सरकार करेगी. हमारे यहां कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए तो सरकारी तंत्र की ताकत बहुत छोटी पड़ जाती है. लेकिन लोग, एनजीओ सब सहायता लेकर निकल पड़ते हैं, क्यों? क्योंकि जनभागीदारी होती है.”
पीएम के भाषण की अन्य मुख्य बातें
– पीएम ने कहा, “जब दुनिया को पता चलता है कि 100 भाषाएं हैं. 1700 बोलियां हैं तो वे आश्चर्यचकित हो जाते हैं. लोग कहते हैं यूरोप में तो देश बदलता है, भाषा बदलता है तो हमें दिक्कत होती है. आप 100 भाषाओं के बीच कैसे जी रहे हो. उस धरती, संस्कृति, परंपराओं के प्रति हमारा लगाव है. इसलिए कोई भी हिंदुस्तानी गर्व से कह सकता है कि मेरा देश विविधताओं का देश है.”
– अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि कृषि और सहकारी क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. भारत की नारी शक्ति भारत के विकास में योगदान कर रही है.
– पीएम ने कहा, ”अपनी जड़ों के साथ जुड़ने से एक ताकत मिलती है. आपमें से बहुत से लोग होंगे, जिन्होंने हिंदुस्तान नहीं देखा है. बहुत से ऐसे होंगे जिनके दादा-परदादा हिंदुस्तान छोड़कर आए, उन्हें कुछ पता नहीं. इसके बावजूद उनके दिल में हिंदुस्तान आज भी मौजूद है.”
– छोटे से नीदरलैंड में भी भारतीयों का दम है.- क्या कभी आपने सोचा कि आप अगर डेढ़ सौ साल भारत से अलग होते हैं तो क्या आपके अंदर वहीं भारतीयता बरकरार होता जैसे सूर्यनाम के लोगों का है.
– पीएम ने कहा, “मैं चाहूंगा कि यहां पर रहने वाले पासपोर्ट का रंग कोई भी क्यों न हो, पासपोर्ट का रंग बदलने से खून के रिश्ते नहीं बदलते हैं. मेरी हर हिंदुस्तानी से आग्रह है कि पासपोर्ट के रंग के हिसाब से रिश्ते नाते न जोड़ें.”
– पूरे यूरोप में नीदरलैंड वह देश है जहां सेकंड लार्जेस्ट इंडियन डायस्पोरा है. उन्होंने कहा कि यहां के लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीयों से संबंध स्थापित कर सकते हैं. संगठन में ही शक्ति है.
– मैं नहीं मेरे देश की सवा सौ करोड़ जनता देश चलाती है. जनभागीदारी से देश कई गुणा तेज गति से प्रगति कर सकता है.
इससे पहले पीएम ने नीदरलैंड को भारत के आर्थिक विकास का स्वाभाविक साझेदार बताते हुए कहा कि देश के बड़े वाणिज्यिक फर्मो के साथ द्विपक्षीय संबंध तेजी से बढ़ेंगे. प्रधानमंत्री मोदी और डच समकक्ष मार्क रूट के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने सामाजिक सुरक्षा, जल संरक्षण और सांस्कृतिक सहयोग के तीन सहमतिपत्रों पर हस्ताक्षर किया.
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन समझौता और संवहनीय उर्जा विकसित करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई.
दोनों नेताओं के बीच वार्ता से पहले, मोदी ने मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) में भारत की सदस्यता के लिए समर्थन करने को लेकर यूरोपीय देश को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, “आपके समर्थन के कारण ही भारत को एमटीसीआर की सदस्यता मिली है.” भारत बतौर पूर्ण सदस्य पिछले वर्ष एमटीसीआर में शामिल हुआ. एमटीसीआर सदस्यता ने भारत को अत्याधुनिक मिसाइलें खरीदने और रूस के साथ संयुक्त उपक्रमों को बेहतर बनाने में मदद की है.
मोदी ने कहा कि नीदरलैंड दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा निवेश साझेदार है और पिछले तीन वर्षो में यह भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है. उन्होंने कहा, “भारत और नीदरलैंड के बीच संबंध बहुत पुराने हैं. हमारे द्विपक्षीय संबंध बहुत मजबूत हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और नीदरलैंड के बीच संबंध करीब एक सदी पुराना है और दोनों देश इसे मजबूत बनाने की दिशा में काम करते रहेंगे.
संयुक्तरूप से जारी किये गए एक बयान में डच प्रधानमंत्री रूट ने कहा कि वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उभरना राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा, “राजनीतिक इसलिए क्योंकि हम विधि और सुरक्षा के नियमों का सम्मान करते हैं.” उन्होंने सतत संवहनीय उर्जा और पेरिस जलवायु समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के लिए उसकी प्रशंसा की.
रूट ने स्वच्छ भारत और मेक इन इंडिया जैसे कदमों के लिए मोदी की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, “इन लक्ष्यों की प्राप्ति में भारत की मदद करने वाले प्रमुख सहयोगियों में नीदरलैंड भी है. उन्होंने कहा कि यूरोप भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक साझेदार है और भारत के निर्यात का 20 प्रतिशत हिस्सा नीदरलैंड होकर ही जाता है.”
प्रधानमंत्री रूट ने कहा, “ऐसे में, भारत के लिए हम यूरोप में प्रवेश का द्वार हैं.” मोदी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में नीदरलैंड पहुंचे हैं. अमेरिका यात्रा के बाद नीदरलैंड की राजधानी पहुंचने पर मोदी ने ट्वीट किया था, “नीदरलैंड पहुंच गया हूं. यह बेहद महत्वपूर्ण यात्रा है, जो मूल्यवान मित्र के साथ संबंधों को पक्का बनाएगी.” शिपोल हवाईअड्डे पर नीदरलैंड के विदेश मंत्री बर्त कोएंडर्स ने मोदी का स्वागत किया.
इस वर्ष दोनों देश भारत-नीदरलैंड के बीच राजनीतिक संबंधों की 40वीं स्थापना वर्ष मना रहे हैं.
पुर्तगाल, अमेरिका और नीदरलैंड की यात्रा शुरू करने से पहले मोदी ने कहा था, “मैं प्रधानमंत्री रूट से मिलने और द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने को लेकर उत्सुक हूं. मैं आतंकवाद-निरोध और जलवायु परिवर्तन सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर प्रधानमंत्री रूट के साथ विचारों का आदान-प्रदान करूंगा.”