पुणे की 28 साल की महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर नयना पुजारी रेप और मर्डर केस के मामले में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मंगलवार को तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।.वहीं, चौथे आरोपी को मामले में गवाह बन जाने के बाद छोड़ दिया गया था.
योगेश राउत, महेश ठाकुर और विश्वास कदम को 7 अक्टूबर 2009 को उपहरण कर महिला की हत्या करने का दोषी पाया गया है.
बता दें कि पीड़िता का उस वक्त अपहरण किया गया था जब वो खारादी बाइपास पर सवारी का इंतजार कर रही थी. महिला उस वक्त दफ्तर से अपने घर जा रही थी.
गौरतलब है कि योगेश राउत और उसके तीन सहयोगियों ने 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर नयना पुजारी को अगवा कर लिया था. बाद में 7 अक्तूबर, 2009 को खेड़ में जेरावाडी जंगल में उसकी लाश बरामद हुई थी. पोस्टमार्टम के बाद पता चला था कि उसके साथ बलात्कार हुआ था.
अभियोजन पक्ष के वकील ने दलील दी कि ये मामला ‘रेरेस्ट ऑफ रेयर केस’ की श्रेणी में आता है. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से करीब 37 प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की गई.
पुलिस कस्टडी से भागा था आरोपी
– घटना का मुख्य आरोपी योगेश राऊत गिरफ्तारी के बाद सितंबर 2011 में पुणे के ससून हॉस्पिटल से फरार हो गया था। वो डेढ़ साल तक पहचान छुपाकर दिल्ली में रहा। इसके बाद वो शिर्डी आ गया। यहां से उसे फिर गिरफ्तार कर लिया गया।
– नयना के पति अभिजीत और बहन मनीषा गनबावणे ने सभी आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग की थी। इस मामले में तीन साल तक सुनवाई चली और चार जजों ने इसपर फैसला सुनाया.
आपको बता दें कि इस जघन्य घटना के बाद आईटी और बीपीओ सेक्टर में काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे.