नितीश सरकार पर जम के बरसे पूर्व विधायक एवं हम (से.) के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल कुमार

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Rahul Kumar File Photo
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बिहार में किसानों के समस्याओं को लेकर नितीश सरकार पर घोसी के पूर्व विधायक एवं हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल कुमार जम के बरसे उन्होंने बिहार के किसानों, युवाओं का आवाज़ उठाते हुए दैनिक टुडे से बातचीत में बताया कि आज बिहार में किसानो का हालत बद से बदतर होते जा रही है और प्रदेश की नीतीश सरकार शराबबंदी पर अपना पीठ थपथपा रही है, राज्य में फैल रहे भ्रस्टाचार ,गुंडाराज पर इस सरकार का कोई लेना देना नहीं रह गया है, उन्होंने बताया कि शिक्षा के गिरती स्तर को तो हाल ही में इस सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई इंटर के परीक्षाफल ने साबित कर दिया है, उन्होंने बताया कि एक समय था जब बिहार में NDA के शासनकाल में बिहार के प्रबासी बिहार लौटने लगे थे , लेकिन एक बार फिर बिहार डेढ़ दशक पीछे चला गया है ,बिहार के उभरते हुए युवा नेता में से एक घोषी जहानाबाद के पूर्व विधायक राहुल कुमार ने बताया कि जिस राज्य से 86000 लोग दो दिन में दूसरे राज्यों में रोजगार खोजने के लिए चले जाते हैं , जो की राज्य की दुर्दशा खुद व् खुद बयान कर रहा है, युवाओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड देनें का बादा किया गया था लेकिन ये बादा भी फिसड्डी साबित हुई आज राज्य की दशा ऐसी है की युवा रोजगार के लिए दर वदर भटक रहे हैं , उन्होंने कृषि एवं किसानों की दशा के सवाल पर बताया कि , नितीश सरकार द्वारा हाल ही में कृषि के बजट में भारी कटौती कर दी गई है, तथा NDA शासन काल में बनाई गई कृषि कैबिनेट को भंग कर दिया, उन्होंने कहा कि नितीश कुमार से पूछना चाहता हूँ कि क्या कृषि जैसी योजनाएं आपके 7 निश्चय योजना में शामिल नहीं है? उन्होंने २०१५ के बिहार चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि नितीश कुमार ने चुनाव के समय किसानों को धान खरीद पर 200 रुपये बोनस देने का बादा किया था लेकिन बिहार की सत्ता में आ जाने के बाद किसानो की समस्याओं को सुनना तो दूर ,किसानों के लिए जरूरी डीजल अनुदान, कृषि यांत्रिकरण, किसान पाठशाला जैसी सारी योजनाएं उन्होंने ख़त्म कर दिया, राहुल कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य चाहे जितना भी निर्धारित कर दिया जाए अगर सरकार किसानों से उनकी ऊपज खरीदेगी ही नहीं तो किसानों को लाभ कैसे मिलेगा, हम (से) अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार की नाक़ामियाँ बताते हुए कहा कि बिहार में इस साल 90 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई मगर सरकार मात्र 18 लाख मीट्रिक टन की खरीद ही कर पाई उसका नतीजा ये रहा कि राज्य के किसानों को धान को औने-पौने दाम पर बेचने के लिए विवश होना पड़ा, उन्होंने बताया कि कृषि ऋण के ब्याज पर केन्द्र सरकार 5 प्रतिशत अनुदान देती है लेकिन नितीश सरकार ने इसको ढंग से बिहार में लागू ही नहीं किया , जहाँ एनडीए की सरकार के दौरान बिहार के किसानों को ब्याज पर एक प्रतिशत की सब्सिडी दी गई थी जिससे यहाँ के किसानों को मात्र 4 फीसदी ब्याज ही देना पड़ता था , उसको भी नितीश सरकार ने पिछले तीन साल से बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारें हों किसानों को दु:खी रखकर किसी भी राज्य का सर्वांगीण विकास नहीं कर सकती !

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