पटना उच्च न्यायालय ने बिहार के 3 लाख 51 हजार नियोजित शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग वाली याचिका को मंजूर कर लिया है. HC ने कहा कि नियोजित शिक्षकों को भी नियमित शिक्षकों की तरह वेतमान और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए लेकिन बिहार सरकार इस पर अभी भी तैयार नहीं है
बिहार सरकार पर करीब 11 हजार करोड़ का आएगा अतिरिक्त बोझ…
अगर समान काम के लिए समान वेतन देने के HC के फैसले पर बिहार सरकार अमल करती है तो नियोजित शिक्षकों का वेतन दो से ढ़ाई गुना बढ़ जाएगा . एक शिक्षक का औसत वेतन प्रतिमाह 38 से 40 हजार हो जाएगा. गौरतलब है कि नियोजित शिक्षकों के वेतन पर अभी राज्य सरकार को सलाना 10 हजार करोड़ खर्च करना पड़ता है. HC के आदेश के बाद बिहार सरकार को करीब 21 हजार करोड़ रुपए खर्च करने होंगे. यानि करीब 11 हजार करोड़ का एक्स्ट्रा बोझ राज्य सरकार के खजाने पर पड़ेगा. राज्य सरकार का कुल शिक्षा बजट ही करीब 20 हजार करोड़ है जो कुल बजट का लगभग 20-22 फीसदी है.
क्या कहा शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने …
राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि हम HC के फैसले का सम्मान करते हैं. लेकिन नियोजित शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया अलग है. इनकी नियुक्ति भी पंचायती राज संस्थाओं के अधीन संचालित नियोजन इकाइयों के माध्यम से होती है. हम माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का अध्ययन करेंगे उसके बाद फैसला लेंगे. अगर जरूरी हुआ तो HC के फैसले के खिलाफ डबल बेंच या फिर सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेंगे.
महाधिवक्ता ललित किशोर का वयान …
सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति स्थानीय स्वशासी निकाय द्वारा की जाती है.
सरकार इनकी नियुक्ति नहीं करती है. नियमित शिक्षकों की तरह वेतनमान देने की बाध्यता कभी थी नहीं. इसलिए समान काम के लिए समान वेतन देने का फार्मूला यहां लागू नहीं होता है.