गया : बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर भारत के शासन व्यवस्था के जनक थे। उनके लिए देश सबसे ऊपर था। लेकिन उनके अनुयायियों ने उनके विचार तथा पहचान को गरीबो-पिछड़ों के मसीहा और संविधान के निर्माता तक सीमित कर दिया, जो कि उनके प्रति अन्याय है। उक्त बातें राज्यपाल श्री कोविंद शुक्रवार को भारतीय आर्थिक परिषद व मगध विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में परीक्षा भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र के संबोधित करते हुए कहीं।
सेमीनार का उदघाटन श्री कोविंद के अलावा रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर डा. सी. रंगराजन, यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुखदेव थोराट, कुलपति प्रो. कवर अहसन, परिषद के अध्यक्ष डा. टीके शांडिल्य, महासचिव डा. अनिल कुमार ठाकुर व संयोजक डा. मोहन श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा परिषद द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन कर किया !
राज्यपाल ने कहा कि परिषद के एक सौ वें वर्षगांठ पर राष्ट्र के निर्माण में बाबा साहब के सार्थक योगदान पर विचार के लिए आयोजित यह सेमिनार प्रशंसनीय है। बाबा साहब ख्यात अर्थशास्त्री, राजनीतिक चिंतक, कानूनविद्, विचारक थे। वे बेवाक तरीके से लेखन करने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने देश में कुपोषण व गरीबी के लिए अंग्रेज शासन को दोषी ठहराया , देश को प्रगतिशील रास्ते पर ले जाने के पक्षधर थे। केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए जीटीएस में भी बाबा साहब के चिंतन का समावेश है।
आरबीआई के पूर्व गर्वनर डा. सी. रंगराजन ने कहा कि बाबा साहब देश के पहले अर्थशास्त्री थे। आज देश की नीतियां उनके विचारों से अनुप्राणित है। बाबा साहब जाति प्रथा को सारी बुराईयों का जड़ मानते थे। उनका जोर आर्थिक-राजनीतिक न्याय से ज्यादा सामाजिक न्याय पर था।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुखदेव थोराट ने कहा कि बाबा साहब अर्थशास्त्र में कोलंबिया विवि से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और लंदन स्कूल आफ इकॉनोमिक्स में अर्थशास्त्र का अध्ययन किया था। उन्हें भाषा के आधार पर राज्यों के निर्माण के प्रति शंकाएं व चिंताएं थी। लेकिन वे छोटे राज्यों के माध्यम से देश की प्रगति पर जोर देते थे। उतराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना जैसे राज्यों का गठन उनके सिद्धांतों का ही अनुपालन है।
इसके पहले कुलपति व प्रो. थोराट ने राज्यपाल सहित अन्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ, माला, अंगवस्त्र व प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान गाकर हुआ।
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