केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने महिलाओं की मासिक धर्म की समस्या पर बनी फिल्म ‘फुल्लू’ को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया है जिससे सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर घमासान मचा हुआ है , ट्विटर पर कई लोगों ने इस बात पर नाराजगी जतायी है कि इस फिल्म को आखिर ‘ए’ सर्टिफिकेट किसी आधार पर दिया गया है. एक ट्विटर यूजर ने लिखा है, ‘मासिक धर्म से जुड़ी शिक्षा किशोरियों के लिए ही सबसे ज्यादा जरूरी है तो इस फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट क्यों दिया गया है.’
कुछ समय पहले सेंसर बोर्ड ने अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ को प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था और इसकी वजह बताते हुए सेंसर बोर्ड ने लिखा कि यह फिल्म कुछ ज्यादा ही महिला केंद्रित है. फिल्म के यौन दृश्यों और भाषा पर भी बोर्ड ने आपत्ति जताई थी. हाल ही में इस फिल्म को भी ‘ए’ सर्टिफिकेट देकर भारत में रिलीज किए जाने की इजाजत की गई है.
फुल्लू 16 जून को रिलीज हो रही है. इसकी रिलीज से पहले ‘फुल्लू’ की एक स्पेशल स्क्रीनिंग दिल्ली में भी रखी गई थी . मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस स्क्रीनिंग के बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया हैरान थे कि आखिर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने किस आधार पर ‘फुल्लू’ को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया है. मीडिया के लोगों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘सेंसर बोर्ड ने एक ऐसी फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया है, जिसका मकसद दर्शकों का सिर्फ मनोरंजन करना नहीं, बल्कि देश की महिलाओं को अपनी हेल्थ के प्रति जागृत करना है.
फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिए जाने पर इसकी लीड ऐक्ट्रेस ज्योति शेट्टी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘बोर्ड ने फुल्लू को ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया है. खुद मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट किस आधार पर दिया गया है. हमारी फिल्म का सब्जेक्ट टीनएजर्स के लिए जानना सबसे ज्यादा जरूरी है. लेकिन अब ‘ए’ सर्टिफिकेट मिलने से दर्शकों की टीनएजर्स वर्ग फिल्म नहीं देख पाएगी.’