सस्ते हो सकते हैं होम लोन, रेपो रेट में .25% की कटौती

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नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है, जिससे रेपो रेट घटकर 6 प्रतिशत रह गया है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत घटाकर सात साल के सबसे निचले स्तर 6.0 फीसदी पर ला दिया है, और रिवर्स रेपो रेट में भी 0.25 प्रतिशत की कमी किए जाने से यह 5.75 फीसदी रह गया है. अब लगभग तय है कि होम लोन तथा अन्य प्रकार के कर्ज लेने वाले लोगों को राहत मिलेगी, क्योंकि माना जा रहा है कि बैंक भी ब्याज दरों में कमी करेंगे. रेपो रेट में की गई कमी से बैंकों को आरबीआई से लिए गए कर्ज़ पर कम ब्याज चुकाना होगा, और इससे उनकी संचालन लागत कम होगी, जिसका लाभ ग्राहकों और कर्ज़दारों को दिया जाएगा.

दरअसल, रोजमर्रा के कामकाज के लिए बैंकों को भी बड़ी-बड़ी रकमों की ज़रूरत पड़ जाती है, और ऐसी स्थिति में उनके लिए देश के केंद्रीय बैंक, यानि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से ऋण लेना सबसे आसान विकल्प होता है. इस तरह के ओवरनाइट ऋण पर रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. सो, अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि जब बैंकों को कम दर पर ऋण उपलब्ध होगा, वे भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी ब्याज दरों को कम कर सकते हैं, ताकि ऋण लेने वाले ग्राहकों में ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ोतरी की जा सके, और ज़्यादा रकम ऋण पर दी जा सके.

रिवर्स रेपो रेट में भी 0.25 प्रतिशत की कमी किए जाने से यह 5.75 फीसदी रह गया है. जब कभी बैंकों के पास दिन-भर के कामकाज के बाद बड़ी रकमें बची रह जाती हैं, वे उस रकम को रिजर्व बैंक में रख दिया करते हैं, जिस पर आरबीआई उन्हें ब्याज दिया करता है. अब रिजर्व बैंक इस ओवरनाइट रकम पर जिस दर से ब्याज अदा करता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.

पिछले चार बार से नहीं बदला था रेपो रेट…
दिसंबर 2016: रेपो रेट (6.25%), रिवर्स रेपो रेट (5.75%) में कोई बदलाव नहीं
फ़रवरी 2017: रेपो रेट (6.25%), रिवर्स रेपो रेट (5.75%) में कोई बदलाव नहीं
अप्रैल 2017: रेपो रेट (6.25%) में बदलाव नहीं, रिवर्स रेपो रेट 5.75% से 6%
जून 2017: रेपो रेट (6.25%), रिवर्स रेपो रेट (6%) में बदलाव नहीं

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