नई दिल्ली : मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ के आरोप लगाने वाले नेताओं एवं राजनीतिक पार्टियों को चुनाव आयोग ने खुला चैलेंज दिया है. चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की सुरक्षा का दावा करते हुए कहा कि हम सभी राजनीतिक पार्टियों एवं आरोप लगाने वाले नेताओं को चुनौती देते हैं ,मई के पहले हफ्ते से लेकर 10 मई के बीच कोई भी EVM को हैक करके दिखाए.
सूत्रों के अनुसार , मई के पहले हफ्ते से कई विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और टेक्नीशियन एक हफ्ते या 10 दिन के लिए आकर मशीनों को हैक करने की कोशिश कर सकते हैं. चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि यह चैलेंज एक हफ्ते से 10 दिन के लिये रह सकती है और इसमें तरह तरह के लेयर होंगे. चुनाव आयोग इस दौरान EVM में टैंपरिंग करने के साथ इन मशीनों को खोलकर भी उसमें छेड़छाड़ करने की चुनौती दे सकता है.
राजनीतिक दलों द्वारा EVM पर सवाल उठाया जा रहा है !
बताते चलें की बिभिन्न राजनितिक पार्टियों में बीएसपी के मायावती, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल सहित समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने EVM की काम करने के तरीकों पर सवाल उठाए थे. कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल जिनमे सोनिया गांधी, राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद और डॉ. मनमोहन सिंह शामिल थे. , EVM हैक मामले को लेकर आज राष्ट्रपति से भी मुलाकात की थी.
वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव आयोग को चैलेंज दिया है कि वह अपने अधिकारी की निगरानी में उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन दे तो वे साबित कर देंगे छेड़छाड़ होती है. उनका दावा है कि मशीन तैयार करते वक्त जब प्रोग्रामिंग की जाती है, उसी वक्त डाटा में गड़बड़ी की जा सकती है. यानी मेमोरी में डाटा फीड करते समय में ही ये सारा खेल किया जाता है, तभी आगे भी मशीन गड़बड़ नतीजे दे सकती है. इन रोज-रोज के आरोपों और सोशल मीडिया में हो रहे वायरल चीजों से ऊब कर चुनाव आयोग ने इस आयोजन को करने की ठानी .
चुनाव आयोग सभी आरोपों को खारिज कर चुका है
इन सब आरोपों पर चुनाव आयोग का कहना है कि ये सभी बातें जो राजनीतिक पार्टियां एवं कुछ नेता लोग कर रहे हैं वो तर्क सांगत नहीं है और प्रोग्रामिंग में भी गड़बड़ी मुमकिन नहीं है. ऐसा हो ही नहीं सकता कि बूथ पर पोलिंग एजेंट को चेक कराते वक्त मशीन दूसरा नतीजा दे और वोटिंग के समय दूसरा नतीजा दे. चुनाव आयोग ने चुनौती दी है कि ऐसे आरोप लगाने वाले अपनी बात साबित करें.
2004 में भी हो चुका है ऐसा आयोजन
ये कोई एकदफा नहीं है इससे पहले भी 2004 के समय में भी चुनाव आयोग ने इस तरह के कार्यशाला आयोजित की थी. उस समय भी कोई विशेषज्ञ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक या टेंपर नहीं कर पाया था. लेकिन तब भी बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत कई दिग्गजों ने चुनाव हारने के बाद ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे. चुनाव आयोग ने कहा की 2009 में भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनियता पर सवाल उठाए जाने के बाद हमने खुला चैलेंज दिया था, लेकिन कोई इसे साबित नहीं कर सका.