चुनावी वादों के प्रति जवाबदेह बनें पार्टियां, उसे कागज़ के टुकड़ों में न समेटें : CJI खेहर

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सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि भारतीय नागरिकों की याददाश्त कमजोर होने की वजह से चुनावी घोषणा पत्र कागज के टुकड़े बनकर रह जाते हैं. इसके लिए राजनीतिक पार्टियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जब वादे पूरे नहीं होते हैं तो पार्टियां आम सहमति न होने का बहाना बनाती हैं

जस्टिस खेहर के मुताबिक चुनावी वादे पूरा न होने पर राजनीतिक दल बड़ा अजीब तर्क देते हैं कि उनके पार्टी के सदस्यों के बीच इस बारे में सहमति नहीं बन पाई. वहीं, 2014 के आम चुनाव के घोषणा-पत्रों पर उन्होंने कहा, ‘एक भी राजनीतिक दल ने आर्थिक सुधार और वंचित तबके के लिए सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित कराने के संवैधानिक लक्ष्य के बीच किसी तरह के जुड़ाव का जिक्र नहीं किया है.’ चीफ जस्टिस खेहर के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त चीजें बांटने के खिलाफ चुनाव आयोग को निर्देश दिया था. उन्होंने कहा था कि पार्टियां इसका उल्लंघन करती हैं.

वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज दीपक मिश्रा ने कहना था कि चुनावों में लोगों की क्रय शक्ति की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के दिमाग में यह बात होनी चाहिए कि चुनाव लड़ना कोई निवेश नहीं है. जस्टिस दीपक मिश्रा का यह भी कहना था कि चुनाव अपराधीकरण से मुक्त होना चाहिए और मतदातों को उम्मीदवारों के गुणों के आधार पर मतदान करना चाहिए.

इस सेमिनार मे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी मौजूद थे
कमजोर गठबंधन से बनीं सरकारें अधिक दिनों तक नहीं टिकती: प्रणब मुखर्जी
– प्रणब मुखर्जी ने चुनाव सुधारों पर जोर देते हुए कहा है, ” इनसे ही देश की जनता को न्याय मिल पाएगा और संवैधानिक मूल्यों और उसके आदर्शों को सुरक्षित रखा जा सकता है। पिछले कुछ सालों में गठबंधन की सरकारों के रहने से अस्थिरता का माहौल रहा और इस वजह से देश में बार-बार चुनाव होते रहे, क्योंकि कमजोर गठबंधन से बनीं सरकारें अधिक दिनों तक टिकती नहीं हैं।”
– ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि चुनाव सम्बन्धी प्रोसेस का बारीकी से अध्ययन किया जाए ताकि इस सिस्टम की खामियों को दूर किया जा सके। संसद भवन केवल बहस करने की जगह नहीं है बल्कि वह फैसला लेने वाला सबसे बड़ी अहम जगह है।”

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